क्या आपने LiFi टेक्नोलॉजी का नाम कभी सुना है। अगर नही तो आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।
Li-Fi क्या है light fidelity or Li-Fi एक विज़िबल लाइट कम्युनिकेशन सिस्टम है, जो कि wifi के तरह ही एक वायर लेस टेक्नोलॉजी है और यह बहुत ही हाई स्पीड पर डेटा को कम्यूनिकेट करवाता है। यह टेक्नोलॉजी हमारे घर में मौजूद साधारण सी LED का इस्तेमाल करके upto 224 gb स्पीड पर डेटा को ट्रांसफर करवाता है। ध्यान रखें कि यहां gb का मतलब gigabits है न कि gigabyte, इन दोनों में काफी अंतर है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर हमारे घर मे मौजूद led बल्ब के द्वारा डेटा का ट्रांसफर कैसे पॉसिबल है। तो चलिए आपको बताते हैं, इसके बारे में
Li-Fi टर्म का सबसे पहले इस्तेमाल University of Edinburgh के एक प्रोफेसर हेराल्ड हास के द्वारा किया गया था। हास ने ही सबसे पहले यह कल्पना किया था कि led बल्ब को भी हम एक राऊटर के तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। Li-Fi काम कैसे करता हैवाईफाई और Li-Fi दोनों समान ही है, क्योंकि दोनों ही electromagnetically डाटा को ट्रांसफर करते हैं। पर यहां एक अंतर यह है कि Li-Fi विज़िबल लाइट पर काम करता है जबकि वाईफाई रेडियो वेव्स पर काम करता है।
जैसा कि हम जानते हैं कि लाई फाई एक विजिबल लाइट कम्युनिकेशन सिस्टम है। इसका मतलब ये हुआ कि यह Li-Fi, फ़ोटो-डिटेक्टर(इसे फ़ोटो सेंसर भी कहा जाता है और यह लाइट या फिर अन्य इलेक्ट्रो मैग्नेटिक एनर्जी से संबंधित सेंसर होता है ), को लाइट सिग्नल को रिसीव करने के अनुकूल बना देता है और इसके बाद सिग्नल प्रोसेसिंग एलिमेंट इस लाइट सिग्नल को स्ट्रीम एबल सिग्नल में कन्वर्ट कर देता है। जिससे हम आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल करने में सक्षम हो पाते हैं। यह टेक्नोलॉजी निश्चित रूप से wifi से बेहतर और एडवांस है।



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